लगभग साठ वर्षों से निरंतर साहित्यरत रमेश जोशी की नौवीं किताब निरगुन कौन देस को बासी' एक व्यंग्य संग्रह है, जिसमें लेखक ने एक ही उद्देश्य रखा है सच को सच कह सकें निडर हो/ इतनी तो आजादी देना । इसीलिये बृहद पाठक वर्ग ने जोशी के अब तक के तीन व्यंग्य संग्रहों को बहुत तल्लीनता से स्वीकारा है। ___ लेखक ने अपनी बात में बहुत आध्यात्मिक भाव से लिखा है जो ईश्वर की तरह निर्गुण और निरपेक्ष है उससे किसी को कोई मतलब नहीं है पर जो दुनिया में है और जिसके कर्म-सत्कर्मदुष्कर्म हमें प्रभावित करते हैं उसकी समीक्षा करने का सबको अधिकार है। यह समीक्षा व्यक्ति नहीं, उसके कर्मों की होती है। इसी गुण-अवगुण के आधार पर इस किताब के 88 व्यंग्य लेखों मे जोशी ने सामाजिक, आर्थिक, राजनीति, मूल्य, विज्ञान, जानवर, और राजनेताओं जैसे नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी पर जम कर तंज बरसाये हैं।जोशी ने प्रतीकात्मक रूप में एक 'तोताराम' का नायक, जिसके माध्यम से उन्होंने समाज को सूत्रधार और प्रेरक बनाया हुआ है, जिसके माध्यम से उन्होंने समाज को वह आईना पाठक को दिखाया है जो थोड़ा सत्य और असत्य से सीधा साक्षात्कार कराता है। शीर्षक प्रधान व्यंग्य आलेख में मोदी सरकार को केंद्र बिन्दु बनाकर तोताराम इस लेखक का इंटरव्यू लेता है यह कहकर कि प्रधानमंत्री को अब कहां फुर्सत है। आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी तो दर्शनीय और स्मरणीय रह गये हैं। सोचा भूतपूर्व अध्यापक और निरंतर आए हैं, जिससे पता चले कि उन्हें विचारक जोशी का साक्षात्कार लेने आए हैं, जिससे पता चले कि उन्हें भाजपा सरकार के अच्छे दिन कैसे लगे? इस आलेख में लेखक ने श्रीकृष्ण का दूत बनकर निर्गुण का उपदेश देने आए उद्धव और गोपियों का भी जिक्र आज के संदर्भ में किया है। संग्रह की कई रचनाओं में तोताराम का पुनर्जन्म, तोताराम का ट्वीट, तोताराम और विज्ञान, तोताराम के आइडिये, और तोताराम का चैलेंज उल्लेखनीय हैं।
तज बरसाते धारदार व्यंग्य