नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संशोधित नागरिकता कानन की संवैधानिकता को चनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दायर कर दिया है। अपने जवाब में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि यह कानून किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता और इससे संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन होने का कोई सवाल नहीं उठता है। सीएए केंद्र को मनमानी शक्तियां नहीं देतानागरिकता इस कानन के तहत निर्देशित तरीकों से दी जाएगीबता दें कि इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हए सप्रीम कोर्ट में अब तक 160 से अधिक याचिकायें दायर की जा चुकी हैं ।कांग्रेस के नेतत्व वाली राजस्थान सरकार ने सोमवार (16 मार्च) को नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। राजस्थान सरकार ने कहा कि यह कानुन धर्मनिरपेक्षता के बनियादी ढांचे के सिद्धांत और संविधान में प्रदत्त समता और जीने के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता हैकेरल के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है जिसने नागरिकता संशोधन कानन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिये संविधान के अनुच्छेद 131 का सहारा लेकर शीर्ष अदालत में वाद दायर किया है। इस अनुच्छेद के अंतर्गत केन्द्र से विवाद होने की स्थिति में राज्य सीधे शीर्ष अदालत में मामला दायर कर सकता है ।राज्य सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को संविधान के प्रावधानों के इतर और शून्य घोषित करने का अनुरोध किया है। नागरिकता संशोधन कानून, 2019 में प्रावधान है कि अफगानिस्तान,